मोबाइल शिक्षकों के लिए वरदान है या बच्चों के लिए अभिशाप

सेवानिवृत शिक्षक पं. रमेश मिश्र


बिहार।वर्तमान में जहां पठन पाठन में विद्यालयों में बहुतेरे शिक्षक मोबाइल के इस्तेमाल पर निर्भर हैं वही इसका दुष्परिणाम कहीं ना कहीं बच्चों के सीखने के अवसर पर पड़ रहा हैं। प्राय: देखा जाता है कि प्रश्नों का उत्तर शिक्षक मोबाइल से खोज कर सीधे बोर्ड पर लिख देते हैं।जबकि बच्चों का बौद्धिक विकास पूर्ण रूप से तब तक संभव नहीं है, जब तक संबंधित विषय वस्तु अथवा पाठ पर बच्चों में व्यापक चर्चा कर और शिक्षक एक सुगमकर्ता के रूप में अपनी भूमिका सुनिश्चित करते हुए ,बच्चों को खुद कर के सीखने का मार्ग प्रशस्त नहीं करते।विभागीय निर्देश के बावजूद भी आज भी एक नई प्रथा शिक्षकों में प्रचलित हो गई है ।प्रश्न का उत्तर सीधे मोबाइल से डाउनलोड कर बोर्ड पर लिख देना। इसका सबसे बड़ा नुकसान बच्चों को हो रहा है ,जबकि शिक्षक का प्रथम कर्तव्य है बच्चों में समझ को विकसित करना ।

समझ को विकसित करने का एकमात्र उपाय किसी भी विषय वस्तु या निर्धारित विषय वस्तु पर ज्यादा से ज्यादा चर्चा कर बच्चों को स्वयं करके सीखने के लिए प्रोत्साहित करना,जब तक ऐसा नहीं होगा बच्चों में सर्वांगीण विकास या शैक्षिक विकास असंभव है ।विशेष कर आधुनिक युग में मोबाइल का उपयोग एक तरफ जहां बहुत सारी जानकारियां इकट्ठा करने के लिए आवश्यक हैं ,वहीं इसका सही इस्तेमाल नहीं होना उतना ही विपरीत परिणाम दायक है। अनुभव के आधार पर यह कहा जा सकता है की बच्चों में समझ को विकसित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा संबंधित विषय वस्तु पर चर्चा किया जाए और बच्चों को खुद करके सीखने का अवसर प्रदान किया जाए। इससे बच्चों का समझ तो विकसित होगा ही ,साथ ही बच्चे बहुत सारी चीज खुद करके सीखने के लिए प्रोत्साहित होंगे ।शिक्षक जब तक मोबाइल से प्रश्न का उत्तर डाउनलोड कर सीधे बोर्ड पर नोट करने के बजाए संबंधित विषय वस्तु को खुद समझकर बच्चों में चर्चा कर एक एक बेहतर सुगमकर्ता के रूप में खुद को प्रस्तुत नहीं करेंगे, तब तक बच्चों में पूर्ण शैक्षिक विकास असंभव है।

इसके लिए बार-बार विभागीय दिशा निर्देश के बावजूद आज भी बहुत सारे शिक्षक पठन-पाठन में मोबाइल का गलत इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में विद्यालय के प्रधानाध्यापक की जवाब देही महत्वपूर्ण हो जाती है कि निरंतर निगरानी कर तथा समय-समय पर शिक्षकों के साथ बैठक कर, शिक्षकों को बच्चों के बीच एक बेहतर सुगमकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहित करें। इससे बच्चों में खोजी मानसिकता प्रवृत्ति विकसित होगी जिससे बच्चों का शैक्षिक विकास तीव्र गति से हो पाएगा।वर्तमान में ए आई के जमाने में सोशल मीडिया पर या गूगल पर बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर, बच्चों के पाठ्य पुस्तक से इतर होता है । साथ ही साथ बच्चे अनुकरण करने में माहिर होते हैं और वर्तमान में लगभग प्रत्येक घर में आधुनिक मोबाइल उपलब्ध है। जिसका दुष्प्रभाव होता है की बच्चे घर पर भी दिए गए गृह कार्य का उत्तर मोबाइल से ढूंढ कर लिख देते है।जिससे सर्वाधिक नुकसान बच्चों के बौद्धिक विकास पर पड़ता है।अतः समस्त प्रधानाध्यापक को और विभिन्न स्तर पर जांच करने वाले अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक वर्ग कक्ष में पठन-पाठन में, जब तक अति आवश्यक ना हो तब तक मोबाइल का इस्तेमाल ना करें।

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