भू माफिया और भ्रष्ट राजस्व पदाधिकारियों के गठजोड से शांत दियारा में क्या फिर गरजेगी बंदूकें,बिछेंगी लाशें।


प्रो.डाॅ.अरविंद नाथ तिवारी
बिहार में भू माफिया की समस्या लंबे समय से एक गंभीर मुद्दा रही है। भूमाफिया आमतौर पर सरकारी जमीन, विवादित भूमि, गरीबों की जमीन या फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास करते हैं।भूमि अभिलेखों में शामिल खतियान, जमाबंदी आदि में त्रुटियां दिखाकर रिकॉर्ड सुधारने के नाम पर हजार रुपया का नहीं लाखों -लाख रुपया घूस लेकर न्यारा वारा कर रहें हैं।जमीन की बढ़ती कीमतें, शहरी हो या ग्रामीण क्षेत्र में सभी जगह यह कारोबार भू माफियाओं के साथ मिलकर धंधा चला रहें हैं।भूमि विवादों के निपटारे में लंबा समय खींचना,कुछ मामलों में स्थानीय प्रभावशाली लोग और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगते रहें हैं।हालाकि बिहार सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए, हाल के वर्षों से भूमि सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और अतिक्रमण हटाने के अभियान तेज किए हैं। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने भूमाफिया से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू की है।बिहार का पहला वाल्मीकिनगर विधान सभा के कांग्रेस विधायक सुरेन्द्र प्रसाद कुशवाहा ने बीते दिनों में बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास अपने विधान सभा अंतर्गत पडनेवाले सभी अंचलाधिकारी,आर वो और बगहा डीसीएलआर पर भू माफियाओं के साथ गठजोड करके निरीह जनता को परेशान करने का आरोप लगाया है,उन्होंने अपने दिये गये आवेदन में यह कहा है कि बगहा ,मधुबनी, भीतहा,ठकराहा,पिपरासी में प्रशासनिक अनियमितिता की शिकायत मिल रही है ,कि भूमाफिया के मिलीभगत से बड़े पैमाने पर जमीन की अवैध कार्य किए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, उक्त अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की पैतृक और वैध भूमि को नियम विरुद्ध तरीके और आर्थिक लेनदेन (रिश्वत) के माध्यम से दूसरे व्यक्तियों के नाम पर दर्ज (म्यूटेशन) किया जा रहा है। इस अवैध कृत्य से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।उल्लेखनीय है कि वर्तमान मे वाल्मीकिनगर और पूर्व में धनहा विधान सभा के नाम से जाने जानेवाला इस क्षेत्र में जमीनी विवाद के कारण एक दिन में कई-कई लाशें बिछ चुकी हैं।जमीनी विवाद के कारण कई-कई दस्युओं का जन्म हुआ, जिनमें बासुदेव यादव,राधा यादव,चुम्मन यादव,रामचन्द्र मल्लाह,रामबासी महतो आदि का नाम शामिल है।यहां भूमि विवाद सबसे बड़ी चुनौती रही है,जो बिहार सरकार के लिए कानून-व्यवस्था की चुनौती बनी रही है। कई रिपोर्टों में बताया गया है कि जमीन से जुड़े विवादों के कारण
में राजस्व भूमि, गैर-मजरूआ भूमि पर दावेदारी,नदी किनारे की भूमि पर कब्जा करने का आरोप है।पंचायत और ग्रामीण स्तर पर खेत-सीमा (मेढ़) को लेकर विवाद में हिंसक घटनाएं और मुकदमे बड़ी संख्या में दर्ज होते रहे हैं और इसके मूल कारणों में भू माफिया, अंचलाधिकारी,अमीन ,कर्मचारी और इनके दलालों का गठजोड रहा है,ऐसी बात नहीं है कि यह समस्या सिर्फ वाल्मीकिनगर में रहा,बिहार के अरवल,नालंदा,अररिया,रोहतास,आरा,नवादा आदि जगहों पर भी रहा।नितीश कुमार की सरकार इस पर नियंत्रण करना चाही।भू राजस्व मंत्री विजय चौधरी ने भू राजस्व विभाग को सुधारने के लिए कमर कसा, इन प्रशासनिक पदाधिकारियों पर कार्रवाई भी की।सम्राट चौधरी की सरकार में भू राजस्व मंत्री विजय सरावगी ने अंचल अधिकारियों को चेताया भी है,परंतु भूमाफियाओं से मोटी रकम की कमाई करनेवाले पदाधिकारियों को डर और भय सरकार से नहीं है,इसी बात की चिंता सता रही वाल्मीकिनगर विधायक सुरेन्द्र कुशवाहा को, मजबूरन भूमाफिया और इन राजस्व पदाधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री के पास आवेदन देकर गुहार लगानी पडी है ,कि कहीं फिर धनहा के शांत दियारा में बंदूके गरजने न लगे,बहरहाल सम्राट चौधरी की सरकार उक्त भ्रष्ट पदाधिकरी और भूमाफियाओं पर लगाम लगाने में कितना सफल रह रही है,यह आनेवाला समय ही बतायेगा।