पौधों में बीमारी फैलाने वाले खास फंगस  के एक नए जीनस, ‘हायलोकमलोमाइसीज़’ की खोज हुई।

वाराणसी।उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बॉटनी (वनस्पति) विभाग के शोधकर्ताओं ने पौधों में बीमारी फैलाने वाले खास फंगस (फाइटोपैथोजेनिक फंगस) के एक नए जीनस, ‘हायलोकमलोमाइसीज़’ की खोज की है। यह खाेज बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है जाे फंगस के वर्गीकरण (टैक्सोनॉमी) में एक महत्वपूर्ण योगदान है और भारत की समृद्ध में भी, लेकिन अभी भी काफी हद तक अनखोजी फंगल जैव-विविधता को उजागर करना है।

शोध का नेतृत्व विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र सिंह ने किया। उनकी टीम में सौम्यदीप राजवार, संजय यादव, संजीत कुमार वर्मा और अर्चना सिंह शामिल है। इस संयुक्त अध्ययन में नेशनल फंगल कल्चर कलेक्शन ऑफ इंडिया , आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे के वैज्ञानिक डॉ. पारस नाथ सिंह, चीन के प्रोफेसर सामंथा, पं.दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की डॉ. गार्गी सिंह, केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. शंभू कुमार भी शामिल रहे। डॉ राघवेन्द्र सिंह के अनुसार नई पहचानी गई फंगस की खोज उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित चंद्रप्रभा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में ‘कैसिया फिस्टुला’ (जिसे आमतौर पर अमलतास या गोल्डन शावर ट्री कहा जाता है) को प्रभावित करने वाली पत्तियों पर धब्बे (लीफ स्पॉट) की एक उभरती हुई बीमारी के साथ की गई थी।

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