बगहा के लाल डॉ.आदित्य अंशुल ने साईबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए की एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मिलेगी एक नई दिशा।

डॉ.आदित्य अंशुल
बगहा के लाल डॉ.आदित्य अंशुल ने साईबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए की एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मिलेगी एक नई दिशा।
हार्डवेयर आईपी (बौद्धिक संपदा) सॉफ्टवेयर पाइरेसी को रोकने और डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने में करेगा मदद।
बगहा।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी इंदौर की एक टीम प्रोफेसर अर्निबल सेन गुप्ता के नेतृत्व में ट्रांसलेशन रिसर्च फेलो डॉ आदित्य अंशुल के साथ मिलकर हार्डवेयर आईपी (बौद्धिक संपदा) डिजाइनों की साईबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है ,जो फिंगरप्रिंट द्वारा उसके वास्तविक मालिक का पता लगाएगा। डॉ.आदित्य अंशुल की खोज एक महत्वपूर्ण कदम है। जो साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को मजबूत करेगा।यह सॉफ्टवेयर पाइरेसी को रोकने और डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने में मदद करेगा,जिससे एक सुरक्षित साइबर इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी। डॉ.आदित्य अंशुल की इस खोज ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है,और इससे साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा मिलेगी।यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो देश को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने में मदद करेगी।इस महत्वपूर्ण खोज से विशेषकर बिहार सहित बगहा के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों ने डॉ. आदित्य अंशुल के इस विशेष उपलब्धि पर पश्चिमी चंपारण अंतर्गत बगहा नगर के आनंदनगर वार्ड नंबर 16 में स्थित आवास पर उनके पिता संजय तिवारी को लगातार बधाई व शुभकामनाएं देने पहुंचे रहे हैं।आपको बता दें कि बगहा नगर के आनंदनगर निवासी एक साधारण किसान संजय तिवारी व गृहणी पूनम तिवारी के पुत्र ने इंदौर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में अपना अलग पहचान कायम किया हुआ है। संजय तिवारी ने अपने आवास पर इस संदर्भ ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त संस्थान के छात्रों की एक टीम प्रोफेसर अर्निबल सेन गुप्ता के नेतृत्व में ट्रांसलेशन रिसर्च फेलो डॉ. आदित्य अंशुल के साथ मिलकर हार्डवेयर आईपी (इंटलेक्शुअल प्रॉपर्टी, बौद्धिक संपदा) डिजाइनों की साईबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है, जो फिंगरप्रिंट द्वारा उसके वास्तविक मालिक का पता लगाएगा। इस महत्वपूर्ण खोज में सफलता हासिल होने से स्वजन सहित क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों ने डॉ. आदित्य अंशुल के इस विशेष उपलब्धि पर उनके पिता संजय तिवारी को बधाई देने उनके आवास पहुंच रहे हैं। संजय तिवारी के पुत्र डॉ आदित्य अंशुल ने आईआईटी इंदौर में पोस्ट डाक कर रहे हैं। प्रोफेसर अनिंबल सेन गुप्ता के नेतृत्व वाली टीम में शामिल बगहा के सुपुत्र डॉ. आदित्य अंशुल के इस उपलब्धि से बगहा सहित बिहार का नाम पुरे देश में रोशन हुआ है। यह चिप खास तौर से पाइरेसी को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। क्योंकि डीएनए फिंगरप्रिंट से पता लग जाएगा कि इस चिप का वास्तविक मालिक कौन है साथ ही इसके बाद किसी भी सॉफ्टवेयर को अपना नाम देकर बेचना असंभव होगा। इस ऐतिहासिक शोध की सूचना जैसे ही बगहा के लोगों को मिली कि शुभचिंतकों व स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल हैं। सभी उनके आवास पर पहुंचने लगे हैं। इस दौरान गुरुवार की शाम आयोजित एक कार्यक्रम के अवसर पर नैतिक जागरण मंच वेलफेयर ट्रस्ट के सचिव निप्पू कुमार पाठक ने इस सफलता पर गंधराज पौधा भेंट किए तथा शिक्षक देव निरंजन दीक्षित आदि उपस्थित लोगों से चंदन का पौधा लगवाए। बधाई देने वाले गणमान्य राकेश सिंह, निप्पू कुमार पाठक, गिरींद्र पांडेय,मुरारी शरण तिवारी,जितेन्द्र यादव,प्रेम रुगटा,डॉ.अशोक मिश्र,देव निरंजन दीक्षित,विनय यादव आदि उपस्थित रहे।
