*’बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के दावों के बीच बगहा-2 प्रखंड कार्यालय में महिलाओं के लिए शौचालय बंद, पेयजल व्यवस्था भी बदहाल*


*स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 8.23 लाख रुपया की लागत से निर्मित शौचालय लंबे समय से ताला बंद पड़ा है, जिससे महिला और बच्चियों को सबसे अधिक कठिनाई उठानी पड़ रही है*


बगहा।एक ओर केंद्र और बिहार सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा को लेकर अनेक योजनाएं चला रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और नारी सशक्तिकरण जैसे अभियानों को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर बगहा-2 प्रखंड कार्यालय परिसर में महिलाओं और बच्चियों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।प्रखंड कार्यालय में प्रतिदिन आधार कार्ड, राशन कार्ड, जाति, आय, निवास प्रमाणपत्र सहित विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्राएं और ग्रामीण पहुंचते हैं। बावजूद इसके परिसर में बना सार्वजनिक शौचालय आम लोगों के लिए उपयोग में नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 8.23 लाख रुपया की लागत से निर्मित शौचालय लंबे समय से ताला बंद पड़ा है, जिससे महिला और बच्चियों को सबसे अधिक कठिनाई उठानी पड़ रही है। कई बार उन्हें घंटों तक शौच के लिए इंतजार करना पड़ता है या परिसर से बाहर अन्य स्थानों का सहारा लेना पड़ता है।


इधर, बगहा नगर परिषद द्वारा पेयजल की व्यवस्था तो कराई गई है, लेकिन नल के आसपास जलजमाव की स्थिति बनी रहती है। बरसात के मौसम में लोगों को गंदे पानी से होकर पीने का पानी लेने जाना पड़ता है, जिससे असुविधा के साथ-साथ संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार महिलाओं के सम्मान और स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा दे रही है, तब प्रखंड कार्यालय जैसी महत्वपूर्ण सरकारी संस्था में शौचालय बंद रहना और पेयजल व्यवस्था का बदहाल होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बगहा-2 प्रखंड प्रशासन एवं बगहा नगर परिषद से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों ने बंद पड़े शौचालय को तत्काल चालू कराने, उसकी नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा पेयजल स्थल पर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि प्रतिदिन सरकारी कार्यों से आने वाली महिलाओं, बच्चियों और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।

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