जब मैं दुनिया में नहीं रहूंगा

रचना – डॉ अनमोल कुमार
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तुम्हारी आँखों से आँसू बहेंगे,
पर मुझे उनका एहसास नहीं होगा।
इसलिए आज ही मेरे साथ मुस्कुरा लो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तुम मेरे लिए फूल लाओगे,
पर मैं उन्हें देख नहीं पाऊँगा।
इसलिए आज ही अपने प्रेम के फूल अर्पित कर दो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मेरी प्रशंसा करोगे,
पर मैं सुन नहीं पाऊँगा।
इसलिए आज ही कुछ अच्छे शब्द कह दो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मेरी गलतियों को माफ़ करोगे,
पर मुझे पता नहीं चलेगा।
इसलिए आज ही दिल से क्षमा कर दो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मुझे याद करोगे,
पर मैं महसूस नहीं कर पाऊँगा।
इसलिए आज ही मिल लो, बातें कर लो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम सोचोगे कि काश थोड़ा और समय साथ बिताया होता,
तो क्यों न आज ही कुछ पल अपने अपनों के साथ बिता लो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मेरे घर शोक व्यक्त करने आओगे,
जबकि शायद वर्षों से हमने एक-दूसरे से बात तक नहीं की होगी।
इसलिए आज ही हालचाल पूछ लो,
आज ही रिश्तों को जी लो।
जब आपके अपने दुनिया से चले जाते हैं ,
तब शायद एहसास होता हैं कि वो कितने अनमोल थे।
इसलिए अपने परिवार, मित्रों और आसपास के हर व्यक्ति के साथ समय बिताइए।
जहाँ तक हो सके, उनकी सहायता कीजिए और उन्हें खुश रखिए।
उन्हें यह एहसास कराइए कि वे आपके लिए विशेष हैं,
क्योंकि समय कब किसे हमसे दूर कर दे, कोई नहीं जानता।
अकेले हम केवल “बोल” सकते हैं,
लेकिन साथ मिलकर हम “बात” कर सकते हैं।
अकेले हम केवल “आनंद” ले सकते हैं,
लेकिन साथ मिलकर हम “उत्सव” मना सकते हैं।
अकेले हम केवल “मुस्कुरा” सकते हैं,
लेकिन साथ मिलकर हम “हँस” सकते हैं।
यही मानव संबंधों की सबसे बड़ी सुंदरता है।
हम एक-दूसरे के बिना कुछ भी नहीं हैं।
*जब मैं दुनिया में नहीं रहूंगा*
रचना – डॉ अनमोल कुमार
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तुम्हारी आँखों से आँसू बहेंगे,
पर मुझे उनका एहसास नहीं होगा।
इसलिए आज ही मेरे साथ मुस्कुरा लो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तुम मेरे लिए फूल लाओगे,
पर मैं उन्हें देख नहीं पाऊँगा।
इसलिए आज ही अपने प्रेम के फूल अर्पित कर दो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मेरी प्रशंसा करोगे,
पर मैं सुन नहीं पाऊँगा।
इसलिए आज ही कुछ अच्छे शब्द कह दो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मेरी गलतियों को माफ़ करोगे,
पर मुझे पता नहीं चलेगा।
इसलिए आज ही दिल से क्षमा कर दो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मुझे याद करोगे,
पर मैं महसूस नहीं कर पाऊँगा।
इसलिए आज ही मिल लो, बातें कर लो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम सोचोगे कि काश थोड़ा और समय साथ बिताया होता,
तो क्यों न आज ही कुछ पल अपने अपनों के साथ बिता लो।
जब मैं इस दुनिया में नहीं रहूँगा,
तब तुम मेरे घर शोक व्यक्त करने आओगे,
जबकि शायद वर्षों से हमने एक-दूसरे से बात तक नहीं की होगी।
इसलिए आज ही हालचाल पूछ लो,
आज ही रिश्तों को जी लो।
जब आपके अपने दुनिया से चले जाते हैं ,
तब शायद एहसास होता हैं कि वो कितने अनमोल थे।
इसलिए अपने परिवार, मित्रों और आसपास के हर व्यक्ति के साथ समय बिताइए।
जहाँ तक हो सके, उनकी सहायता कीजिए और उन्हें खुश रखिए।
उन्हें यह एहसास कराइए कि वे आपके लिए विशेष हैं,
क्योंकि समय कब किसे हमसे दूर कर दे, कोई नहीं जानता।
अकेले हम केवल “बोल” सकते हैं,
लेकिन साथ मिलकर हम “बात” कर सकते हैं।
अकेले हम केवल “आनंद” ले सकते हैं,
लेकिन साथ मिलकर हम “उत्सव” मना सकते हैं।
अकेले हम केवल “मुस्कुरा” सकते हैं,
लेकिन साथ मिलकर हम “हँस” सकते हैं।
यही मानव संबंधों की सबसे बड़ी सुंदरता है।
हम एक-दूसरे के बिना कुछ भी नहीं हैं।