माॅं दिवस पर विशेष

*माॅं दिवस पर विशेष*
रचना – डॉ अनमोल कुमार
मेरी माॅं से बढ़कर जग में
नहीं है कोई दूजा।
मैंने तो सबसे पहले
उसको ही पूजा ।
इस दुनिया में ईश्वर का
दिव्य उपहार है माॅं ।
क्या मांगू मैं किसी से
स्वयं देवी स्वरूप है माॅं।
माॅं है तो घर, घर है
वरना बियावन जंगल ।
माॅं है तो घर में होता है
नित्य प्रति ही मंगल ।
माॅं है तो घर में है
पूजा दिया आरती ।
माॅं ही तो मुझ पर
नजर निछावर वारती ।
माॅं से ही है मेरी
सारी खुशियाॅं दूनी।
माॅं बिन सब बच्चों की
झोली होती सूनी ।
माॅं ही तो लगाती है
मुझको काला टीका ।
माॅं बिन लगता मुझको
हर इक रंग फीका।
माॅं ने ही उंगली पकड़कर
मुझे चलना सिखाया।
माॅं मेरी प्रथम पाठशाला
सच का मार्ग बताया।
सौ- सौ मन्नते मांगे
माॅं रब से।
मंदिर- मंदिर माथा टेके
मांगे दुआएं सबसे ।