राजनीति से शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता होते हुए समाजसेवा तक पहुंचा रमेश प्रसाद मिश्र का सफर

*डेढ़ दशक के सांगठनिक अनुभव ने दी सार्वजनिक जीवन को दिशा, शिक्षक बनने के बाद कवि-लेखक और पत्रकार के रूप में भी बनाई पहचान*

लेखक–डाॅ.अरविंद नाथ तिवारी
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बगहा। किसी व्यक्ति का सार्वजनिक जीवन केवल उसके पदों से नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ उसके जुड़ाव और बदलती भूमिकाओं से पहचाना जाता है।बगहा नरईपुर के शिक्षक पं.रमेश प्रसाद मिश्र का जीवन भी इसी तरह के बहुआयामी सार्वजनिक सफर का उदाहरण है। करीब डेढ़ दशक तक भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक जीवन से जुड़े रहने के बाद उन्होंने शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के बीच काम किया। आगे चलकर कवि, लेखक और पत्रकार के रूप में सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति दी और अब सामाजिक संगठन में प्रदेश स्तरीय जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

राजनीतिक और सांगठनिक जीवन से शुरुआत
रमेश प्रसाद मिश्र के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राजनीति से हुई। लगभग डेढ़ दशक तक भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक कार्यों से जुड़े रहकर उन्होंने संगठन के विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों में भाग लिया। इस दौर में ग्रामीण समाज और आम लोगों के बीच काम करने का अनुभव उन्हें मिला। यही अनुभव आगे उनके सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में उपयोगी साबित हुआ।
शिक्षक बने तो विद्यार्थियों की सेवा को बनाया माध्यम
राजनीतिक जीवन के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा। शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों के साथ लंबे समय तक काम किया और उनके शैक्षणिक विकास में योगदान दिया। उनके सार्वजनिक जीवन का यह चरण उन्हें सीधे नई पीढ़ी से जोड़ने वाला रहा।सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा के प्रति उनका जुड़ाव बना हुआ है। वे 01 वाल्मीकिनगर विधानसभा के शिक्षा प्रतिनिधि के रूप में शिक्षा से जुड़े विषयों और क्षेत्रीय समस्याओं को सामने रखने में सक्रिय हैं।

साहित्य ने दी विचारों को अभिव्यक्ति
शिक्षण के साथ-साथ साहित्य के प्रति उनका रुझान भी सामने आया। वे कवि और लेखक के रूप में सामाजिक जीवन और मानवीय रिश्तों से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। उनकी कविता ‘मतलब’, जिसे उन्होंने 11 अगस्त 2019 को बाबा धाम से लौटते समय रात 11 बजे लिखा था, रिश्तों में स्वार्थ और बदलती सामाजिक सोच को केंद्र में रखती है।उनकी साहित्यिक गतिविधियां उनके सामाजिक अनुभवों की अभिव्यक्ति का माध्यम बनी हैं।
पत्रकारिता से ग्रामीण मुद्दों को मंच
रमेश मिश्र ने पत्रकारिता को भी अपने सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनाया। वे बिहार ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के प्रदेश संगठन मंत्री के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को आवाज देना और ग्रामीण पत्रकारिता को मजबूत करना उनके पत्रकारिता कार्य का प्रमुख हिस्सा है।राजनीतिक संगठन से लेकर शिक्षा और फिर पत्रकारिता तक के अनुभव ने उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ काम करने का अवसर दिया।
सामाजिक क्षेत्र में मिली नई जिम्मेदारी
उनके सार्वजनिक जीवन में अब एक नया अध्याय जुड़ा है। पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन, केंद्रीय कार्यालय गोरखपुर द्वारा उन्हें सर्वसम्मति से बिहार प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। मनोनयन पत्र 19 जुलाई 2026 को जारी किया गया।फाउंडेशन की ओर से उन्हें संगठन के विस्तार और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। सामाजिक सेवा के प्रति उनकी सोच का सार उनके कथन में दिखाई देता है— “समाज सेवा ही हमारा परम धर्म है।”

बदलती भूमिकाएं, कायम रहा जनसरोकार
रमेश प्रसाद मिश्र की सार्वजनिक यात्रा को एक क्रम में देखा जाए तो यह राजनीति से संगठन, संगठन से शिक्षा, शिक्षा से साहित्य और साहित्य से पत्रकारिता तथा सामाजिक सेवा तक पहुंचती है। अलग-अलग क्षेत्रों में भूमिका बदलने के बावजूद समाज और आम लोगों से जुड़ाव उनके सार्वजनिक जीवन का निरंतर हिस्सा रहा है।आज उनकी पहचान केवल एक पूर्व राजनीतिक कार्यकर्ता या सेवानिवृत्त शिक्षक तक सीमित नहीं है। वे शिक्षक, कवि, लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मिली नई जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है।