शिक्षक दिवस पर कविता*

*शिक्षक दिवस पर कविता*

रचना डॉ अनमोल कुमार

गुरु बिन ज्ञान कहाँ से आए,
अंधकार में दीप जलाए।

अक्षर-अक्षर हमें सिखाया,
जीवन जीना हमें बताया।

डांटा भी तो प्यार से डांटा,
गलत राह से हमें हटाया।

माँ-बाप ने जीवन दिया है,
गुरु ने जीना सिखाया है।

कभी न हम भूलेंगे उपकार,
हे गुरु आपको बार-बार नमस्कार

वो मेरी पहचान बनाते हैं,
मुझे जीने का ज्ञान सिखाते हैं।

कड़ी धूप में छाँव बन जाते हैं,
गिरूं जो मैं तो हाथ बढ़ाते हैं।

किताबों से ज्यादा अनुभव देते हैं,
जीवन को सुंदर अर्थ देते हैं।

ऐसे सच्चे गुरु को मेरा प्रणाम है,
शिक्षक दिवस पर कोटि-कोटि सलाम है।

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