30–50 रुपये में घर-घर पहुँचेगी बकरियों की स्वास्थ्य सेवा: प्रशिक्षित ‘पशु सखियाँ’ बदलेंगी ग्रामीण पशुपालन की तस्वीर।

*पशु सखियाँ बनेंगी ग्रामीण पशुपालकों की सहारा, पश्चिम चम्पारण में पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न।*
*वैज्ञानिक बकरी पालन का मिला प्रशिक्षण, हजारों जीविका दीदियों और पशुपालक परिवारों को होगा सीधा लाभ।*
बेतिया। ग्रामीण क्षेत्रों में अब बकरी पालकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए पशु चिकित्सालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रशिक्षित ‘पशु सखियाँ’ अब बेहद मामूली शुल्क पर उनके घर पहुँचकर बकरियों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराएँगी। यह पहल न केवल पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादकता को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका का नया माध्यम भी बनेगी।
इसी उद्देश्य से जीविका, पश्चिम चम्पारण के तत्वावधान में “बकरी स्वास्थ्य एवं प्रबंधन” विषय पर पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन होटल नील गंगे, बेतिया में किया गया। प्रशिक्षण में लौरिया, बगहा-2, मैनाटांड़, गौनाहा, चनपटिया, नौतन और रामनगर प्रखंडों से आईं जीविका की पशु सखियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक बकरी पालन की तकनीकों से अवगत कराया गया। इसमें पंचसूत्र आधारित बकरी पालन, संतुलित पोषण, चारा प्रबंधन, बेहतर आवास व्यवस्था, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य देखभाल, वैज्ञानिक विधि से बधियाकरण तथा कृमिनाशक दवाओं के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
जीविका एवं आगा खान फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित प्रत्येक पशु सखी अपने क्षेत्र के लगभग 120 बकरी पालक परिवारों को मात्र 30 से 50 रुपये के नाममात्र शुल्क पर उनके घर जाकर प्राथमिक पशु स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराती है। इससे ग्रामीण पशुपालकों को समय पर उपचार मिलने के साथ पशुओं की मृत्यु दर में कमी, उत्पादन में वृद्धि तथा पशुपालन से होने वाली आय में सुधार की उम्मीद है। साथ ही यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीविका के प्रभारी पशुधन प्रबंधक सह युवा पेशेवर अमन तिवारी, जीविकोपार्जन विशेषज्ञ राहुल कुमार रंजन तथा आगा खान फाउंडेशन के डॉ. अंकित यादव ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को बकरी पालन एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान पूर्व से प्रशिक्षित पशु सखी मुन्नी देवी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे अपने क्षेत्र में बकरियों का प्राथमिक उपचार कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 5,000 रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल उनकी आय का साधन ही नहीं, बल्कि गाँव के पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद सेवा भी बन गया है।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को उन्नत बकरी पालन से संबंधित तकनीकी पुस्तकों का वितरण किया गया तथा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रशिक्षित पशु सखियों को अपने-अपने गाँवों में विशेष अभियान चलाकर 300 से 500 बकरियों को कृमिनाशक दवा पिलाने का लक्ष्य दिया गया, ताकि पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हो, रोगों की रोकथाम हो सके तथा बकरी पालन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सके।