कथक क्वीन’ जयंती माला मिश्रा को पद्मश्री देने की मांग तेज, बिहपुर की बहू के सम्मान के लिए बिहार के सांसदों-विधायकों से पहल की अपील


भागलपुर/बिहपुर/मुंबई। कथक जगत में “कथक क्वीन” के नाम से पहचानी जाने वाली प्रख्यात कथक साधिका जयंती माला मिश्रा को पद्मश्री सम्मान दिए जाने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं बल्लारपुर से विधायक सुधीर मुनगंटीवार, जो महाराष्ट्र सरकार में वित्त, योजना, वन एवं सांस्कृतिक मामलों के पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र विधानसभा के सक्रिय सदस्य हैं, ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर जयंती माला मिश्रा के नाम पर पद्मश्री सम्मान के लिए विचार करने का अनुरोध किया है। महाराष्ट्र में सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े उनके सार्वजनिक दायित्व भी दर्ज हैं।
जयंती माला मिश्रा का जन्म वाराणसी में हुआ, जबकि उनका वैवाहिक संबंध भागलपुर जिले के बिहपुर क्षेत्र से है। विवाह के बाद वे मुंबई में रहकर भारतीय शास्त्रीय कथक के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। समर्थकों के अनुसार वे लगभग 60 वर्षों से कथक साधना कर रही हैं तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं आंगनवाड़ी के बच्चों को निःशुल्क कथक प्रशिक्षण भी देती हैं।
जयंती माला मिश्रा स्वयं को बनारस घराने की 10वीं पीढ़ी की कथक साधिका बताती हैं। उनके अनुसार उनकी कला परंपरा महर्षि भरद्वाज की वैदिक परंपरा से जुड़ी है और वे आचार्य सुखदेव महाराज की परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में कथक का प्रदर्शन कर भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया है। उनके अनुसार आज उनके सैकड़ों शिष्य भारत और विदेशों में अपनी-अपनी अकादमियां संचालित कर रहे हैं तथा नई पीढ़ी को कथक सिखा रहे हैं।
जयंती माला मिश्रा का कहना है कि उनके परिवार की कई महान विभूतियों को राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है। उनके अनुसार उनकी माता स्वर्गीय सितारा देवी को पद्मश्री, गोपीकृष्ण को पद्मश्री, पंडित किशन महाराज को पद्मभूषण तथा पंडित शांता प्रसाद को पद्मभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। उनका यह भी कहना है कि बनारस में उनके परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े अनेक कलाकारों को पद्मश्री से लेकर पद्मभूषण तक के राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।
उनका कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से पद्मश्री सम्मान के लिए आवेदन कर रही हैं। उनके अनुसार महाराष्ट्र में मंत्रालय, डायरेक्टर ऑफ कल्चर तथा राजभवन स्तर से उन्हें समय-समय पर सहयोग मिलता रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी अकादमियां मुंबई, वाराणसी, भागलपुर सहित अन्य स्थानों तथा विदेशों में भी संचालित हैं।
बताया जाता है कि अपने एक निजी कार्यक्रम के दौरान बेगूसराय के वास्तु विहार तथा बाद में खगड़िया जिले के संसारपुर पहुंचने पर जयंती माला मिश्रा ने कला प्रेमियों से बातचीत में कहा था कि “एक सच्चे कलाकार के लिए पद्मश्री सम्मान बहुत मायने रखता है।” उन्होंने यह भी कहा कि कलाकारों की दशकों की साधना का सम्मान होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय शास्त्रीय कला के प्रति प्रेरणा मिल सके।
अब कला प्रेमियों और समर्थकों की मांग है कि जिस प्रकार महाराष्ट्र के जनप्रतिनिधि समय-समय पर उनके नाम की अनुशंसा करते रहे हैं, उसी प्रकार भागलपुर, बिहपुर, खगड़िया और बेगूसराय के सांसद एवं विधायक भी भारत सरकार के समक्ष उनके पक्ष में अनुशंसा भेजें। उनका मानना है कि जयंती माला मिश्रा बिहार की बहू हैं और उनके सम्मान से बिहार का भी गौरव बढ़ेगा।
समर्थकों का कहना है कि यदि जयंती माला मिश्रा को पद्मश्री सम्मान प्राप्त होता है तो यह केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं होगा, बल्कि बिहार और भारतीय शास्त्रीय कथक परंपरा के लिए भी गौरव का विषय होगा। उनका मानना है कि देश और विदेश में भारतीय संस्कृति को पहचान दिलाने वाली इस कलाकार के योगदान का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान होना चाहिए।