26 दिसम्बर:भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस पर विशेष
*25 दिसम्बर

*भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिवस पर बिशेष*
आलेख – अनमोल कुमार
हिंदी के कवि, पत्रकार और एक प्रखर वक्ता भारतवर्ष के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई का जन्म 25 दिसंबर उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर में हुआ था| उनके पिताजी श्री पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेई मध्य प्रदेश के ग्वालियर रियासत में एक अध्यापक थे इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे इसलिए अटल जी को परिवार में प्रारंभिक शिक्षा विरासत में मिली लेखन और कविता उन्होंने पिता से प्राप्त किया और लालन पालन भारतीय संस्कृति, संस्कार, परंपराओं का प्यार दुलार अपने मां से प्राप्त किया। कानपुर डीएभी कॉलेज से राजनीतिक शास्त्र में एम ए की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ कानपुर में एलएलबी की पढ़ाई आरंभ की परंतु बीच में विराम देकर पूर्ण निष्ठा के साथ संघ के कार्यों में जुट गए| डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ पढ़ा और साथ ही साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश वीर अर्जुन जैसे पत्र पत्रिकाओं में संपादन का काम किया। 1957 में बलरामपुर उत्तर प्रदेश से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में लोकसभा का चुनाव लड़ा और सफलता प्राप्त की| अटल जी जनसंघ के संस्थापक में से एक थे और 1957 से लेकर 1977 तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे| श्री मोरारजी देसाई के सरकार में विदेश मंत्री और विदेश मंत्री के रूप में विदेश मे भारत की छवि बढ़ाई| 1980 में जनता पार्टी शासन से असंतुष्ट होकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद कि और 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के प्रथम अध्यक्ष रहे| लोकतंत्र के प्रहरी श्री अटल जी 1996 में प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली| 24 संसदीय दलों के साथ उन्होंने भारतवर्ष के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी अलग छाप छोड़ी। अपने प्रधानमंत्री काल में भारत को परमाणु शक्ति, संपन्न राष्ट्र बनाया, पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल कि, कारगिल युद्ध में सफलता प्राप्त की स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना आरंभ की इसके अतिरिक्त उनके प्रमुख कार्यों में। एक सौ वर्ष से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाना, संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये, राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित कीं, आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों के मूल्यों को नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमन्त्रियों का सम्मेलन बुलाया, उड़ीसा के सर्वाधिक निर्धन क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया, आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया, ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की|
आरंभ से ही वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और आजीवन आविवहित थे| अटल जी राजनैतिज्ञ होने के साथ-साथ एक सफल कवि थे उनकी कविता संग्रह मेरी इक्यावन कविताएँ उनके प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है। अटल जी जब किशोर थे उनकी अद्भुत कविता हिंदू तन मन हिंदू जीवन रग रग हिंदू मेरा परिचय हुई राजनीति के साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है। उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिन्दा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था।उनकी रग-रग हिन्दू मेरा परिचय,मृत्यु या हत्या,अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह),कैदी कविराय की कुण्डलियाँ, संसद में तीन दशक,अमर आग है,कुछ लेख: कुछ भाषण,सेक्युलरवाद,राजनीति की रपटीली राहें,बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि प्रकाशित रचनाओं का प्रमुख स्थान है। वे भारत रत्न से भी सम्मानित थे| चाहे प्रधान मन्त्री के पद पर रहे हों या नेता प्रतिपक्ष; बेशक देश की बात हो या क्रान्तिकारियों की, या फिर उनकी अपनी ही कविताओं की; नपी-तुली और विचारमग्न टिप्पणी करने में अटल जी कभी नहीं चूके। यहाँ पर उनकी कुछ टिप्पणियाँ दी जा रही हैं।”भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।क्रान्तिकारियों के साथ हमने न्याय नहीं किया, देशवासी महान क्रान्तिकारियों को भूल रहे हैं, आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारण यह सब हुआ। मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है|
जन संघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साथ-साथ लोकनायक जयप्रकाश के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थे|भारत वासियों के हृदय सम्राट श्री अटल जी ने 16 अगस्त 2018 को अंतिम सास ली|
श्री अटल जी अमर रहे|