पितरों को नमन*

*पितरों को नमन*

*अनमोल कुमार*

*वो कल थे तो आज हम हैं*
*उनके ही तो अंश हम हैं..*

*जीवन मिला उन्हीं से*
*उनके कृतज्ञ हम हैं..*

*सदियों से चलती आयी*
*श्रंखला की कड़ी हम हैं..*

*गुण धर्म उनके ही दिये*
*उनके प्रतीक हम हैं..*

*रीत रिवाज़ उनके हैं दिये*
*संस्कारों में उनके हम हैं..*

*देखा नहीं सब पुरखों को*
*पर उनके ऋणी तो हम हैं..*

*पाया बहुत उन्हीं से पर*
*न जान पाते हम हैं..*

*दिखते नहीं  वो हमको*
*पर उनकी नज़र में हम हैं..*

*देते सदा आशीष हमको*
*धन्य उनसे हम हैं..*

*खुश होते उन्नति से*
*दुखी होते अवनति से*
*देते हमें सहारा*
*उनकी संतान जो हम हैं..*

*इतने जो दिवस मनाते*
*मित्रता प्रेम आदि के*
*पितरों को भी याद कर लें..*
*जिनकी वजह से हम हैं..*

*आओ नमन कर लें कृतज्ञ हो लें*
*क्षमा माँग लें आशीष ले लें*
*पितरों से जो चाहते हमारा भला*
*उनके जो अंश हम हैं..*।

Categories: धर्म क्षेत्र, शिक्षा, साहित्य