अमृत प्रभात 🕉️*उम्मीद का दिया जलाए रखें -पं-भरत उपाध्याय

*🕉️ अमृत प्रभात 🕉️*
*उम्मीद का दिया जलाए रखें -पं-भरत उपाध्याय*
एक घर मे *पांच दिए* जल रहे थे।एक दिन पहले एक दिए ने कहा -इतना जलकर भी *मेरी रोशनी की* लोगो को *कोई कदर* नही है.तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं।वह दिया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । जानते है वह दिया कौन था ?वह दिया था *उत्साह* का प्रतीक ।
यह देख दूसरा दिया जो *शांति* का प्रतीक था, कहने लगा -मुझे भी बुझ जाना चाहिए।
निरंतर *शांति की रोशनी* देने के बावजूद भी *लोग हिंसा कर* रहे है।और *शांति* का दिया बुझ गया ।
*उत्साह* और *शांति* के दिये के बुझने के बाद, जो तीसरा दिया *हिम्मत* का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया। *उत्साह*, *शांति* और अब *हिम्मत* के न रहने पर चौथे दिए ने बुझना ही उचित समझा।चौथा* दिया *समृद्धि* का प्रतीक था।
सभी दिए बुझने के बाद केवल *पांचवां दिया* *अकेला ही जल* रहा था।हालांकि पांचवां दिया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह *निरंतर जल रहा* था।तब उस घर मे एक *लड़के* ने प्रवेश किया।
उसने देखा कि उस घर में सिर्फ *एक ही दिया* जल रहा है।
वह खुशी से झूम उठा।
चार दिए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ।
यह सोचकर कि *कम से कम* एक दिया तो जल रहा है।उसने तुरंत *पांचवां दिया उठाया* और बाकी के चार दिए *फिर से* जला दिए ।
जानते है वह *पांचवां अनोखा दिया* कौन सा था ?
वह था *उम्मीद* का दिया…
इसलिए *अपने घर में* अपने *मन में* हमेशा उम्मीद का दिया जलाए रखिये ।चाहे *सब दिए बुझ जाए* लेकिन *उम्मीद का दिया* नही बुझना चाहिए ।ये एक ही दिया *काफी* है बाकी *सब दियों* को जलाने के लिए .ख़ुशियाँ आएँगी,  कुछ समय बाद सब सामान्य होगा , *उम्मीद का दिया जलाए रखें*

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