समझ लेना मित्र आया है*..

*समझ लेना मित्र आया है*..

रचना – अनमोल कुमार

पड़े पीठ पे जोर की थप्पी
*समझ लेना मित्र आया है…*

चुपके से आ आँखें ढंक ले
*समझ लेना मित्र आया है…*

गले मिलने जब जो फड़के
*समझ लेना मित्र आया है…*

उंचे स्वर में नाम ले पुकारे
*समझ लेना मित्र आया है…*

बिन कहे आ जाए घर में
*समझ लेना मित्र आया है…*

चेहरा देख उदासी भांपले
*समझ लेना मित्र आया है…*

फैसले को जब टास उछले
**समझ लेना मित्र आया है…*

तु-तुकारे जब सुनाई दे तो
*समझ लेना मित्र आया है…*

जेब ढीली करने मे हों झगड़े
*समझ लेना मित्र आया है…*

डांट पड़े जब गलती पर
*समझ लेना मित्र आया है…*

भूमिका मे ही कथा पढ़ ले
*समझ लेना मित्र आया है…*

खुल जाएं बंद किताब के पन्ने
*समझ लेना मित्र आया है…*

खाते देख संग बैठ जाए
*समझ लेना मित्र आया है…*

रात लड़े सुबह खुद आ जाए
*समझ लेना मित्र आया है…*

Categories: मनोरंजन, साहित्य