*वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो*
*वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो* व्यंग्य कविता – *अनमोल कुमार* ठंड ही ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है, कक्ष शीत से भरा, बर्फ से ढकी धरा, यत्न कर संभाल लो, यह समय निकाल लो, *वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो* चाय – चाय मची रहे, पकौड़ियाँ सजी रहे,मुंह कभी थके […]