शिव की महिमा

रचना –  *डॉ अनमोल कुमार*

नीलकंठ, त्रिनेत्रधारी, जटाधारी योगी, 
गले में सर्प, हाथ में डमरू, तन पे भस्म भोगी।

कैलाशपति, भोलेनाथ, सबसे सरल देव, 
क्रोध में रूद्र, करुणा में सबसे बड़े मेहरबान।

जहर पीकर भी जग को अमृत सा जीवन दिया, 
“हर हर महादेव” कहकर हर संकट दूर किया।

बेलपत्र एक चढ़े तो प्रसन्न हो जाएं, 
भक्त की एक आह पर दौड़े चले आएं।

*ॐ नमः शिवाय*

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