गांधी स्मृति यात्रा काशी पहुंचे

*गांधी स्मृति यात्रा काशी पहुंचे*              

रिपोर्ट अनमोल कुमार
           
गया। गांधी स्मृति यात्रा, 1 मार्च को फादर रंजीत के आश्रम, काशी में रुकी। फादर रंजीत गांधी विचार के आस्थावान सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आदतन खादीधारी हैं। 2 मार्च को सुबह फादर रंजीत के साथ गांधी स्मृति के यात्रियों के साथ यात्रा के उद्देश्य और अग्रिम कार्यक्रम पर लंबी चर्चा हुई। गांधी स्मृति यात्रा के अंतिम पड़ाव पर हम सब ने अपना मूल्यांकन किया। यात्रा के दरमियान भविष्य में आयोजित की जाने वाली यात्राओं के संबंध में निर्णय लिया गया।2 दौर में बाकी बचे बिहार और उत्तरप्रदेश के बाद
उड़ीसा ,गुजरात,दक्षिण भारत के बाद, दिल्ली गांधी समाधि पर रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया। संसाधनों के एकत्रीकरण पर विचार किया गया। इस संबंध में देशभर के अपने साथियों और संस्थाओं से संपर्क करने का निर्णय हुआ। यात्री दल के विजय कुमार ने कहा कि हमें यात्राओं में सभी धर्म के संस्थाओं से भी संपर्क बनाना चाहिए क्योंकि हमारा उद्देश्य सद्भावना कायम करना है, यह एक तरह के विचार के लोगों को एक मंच पर लाए बिना संभव नहीं है। चंद्रभूषण जी ने कहा कि यात्राओं में हमें रहने और खाने के खर्च को सीमित करना चाहिए। अब तक के अनुभव से हमने यह सीखा है और इसका प्रतिफल भी मिला है। प्रोफेसर मनोज कुमार ने कहा कि कुमार कलानंद मनी देश भर के ऐसे संस्थानों को जोड़ने में हमारी मदद कर सकते हैं। गिरिजा जी का सहयोग भी लिया जाना चाहिए। देश भर के ऐसे साथियों का जो हमारा राष्ट्रीय संपर्क बढ़ा सकते हैं/ बना सकते हैं, उनके साथ एक कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई जानी चाहिए। व्हाट्सएप ग्रुप पर ऑनलाइन बैठक की जानी चाहिए। राज्य स्तर पर वही के साथियों द्वारा यात्राएं आयोजित की जा सके,इसकी संभावना ढूंढी जानी चाहिए। राज्यों की यात्राओं के बाद राज्य स्तर के बैठक में उस दस्तावेज पर स्वीकृति लेनी चाहिए। तदोपरांत राष्ट्रीय समागम करके  संपादित किया जाना चाहिए। दस्तावेज हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में हो सके इसकी भी कोशिश की जानी चाहिए।सीमा कुमारी ने कहा कि महिलाओं को विशेष रूप से जोड़ा जाना चाहिए। फादर रंजीत ने हर तरह से सहयोग करने का वचन दिया।
यात्री दल ने यात्रा के अनुभवों को और अपने-अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। निर्णय लिया गया कि सभी अपने यात्राओं के अनुभव का वृतांत लिखेंगे।
पूर्व तैयारी की कमी महसूस की गई। पूर्व सूचना नहीं रहने के कारण बहुत से साथी शहर से बाहर थे। होली नजदीक होने के कारण विश्वविद्यालय में छुट्टी हो गई थी। रमजान का समय था। इन कठिनाइयों के बावजूद विभिन्न जगहों पर लगभग 1000 युवा युवती साथियों से संपर्क हो सका। अलीगढ़ प्रयागराज और लखनऊ में बड़ी
बैठक करने का निर्णय लिया गया।लखनऊ में कई समूह के लोग पहली बार एक साथ बैठे। आगे भी इनके बीच संबंध बना रहेगा।
भ्रमण का रास्ता बहुत सोच समझ कर बनाया जाना चाहिए ताकि रास्ते का दोहराव नहीं हो। और संसाधन कथा समय  बचाया जा सके।अब तक की यात्रा में कुमार कलानंद मनी, सुरेंद्र कुमार तथा अवधेश कुमार राधेश्याम यादव आदि ने हम लोगों की बराबर खबर रखी। यात्री दल ने उनके प्रति आभार प्रकट करते हुए आगे भी इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा की।

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