बगहा में गन्ना किसानों का का किया प्रदर्शन,गन्ना मंत्री का फूंका पुतला , ₹400 प्रति क्विंटल बढ़ोत्तरी की उठाई गई मांग

बगहा में गन्ना किसानों का का किया प्रदर्शन,गन्ना मंत्री का फूंका पुतला , ₹400 प्रति क्विंटल बढ़ोत्तरी की उठाई गई मांग
— मिला-जुला गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी से नाराज दिखे किसान।
बगहा।बगहा अनुमंडल मुख्यालय के समीप मुख्य सड़क परगन्ना किसानों ने बिहार सरकार के गन्ना मंत्री का पुतला दहन किया।प्रदर्शनकारी किसानों में लालबाबू यादव,मुन्ना खान,मंकेश्वर दीक्षित, गुड्डू यादव, तारकेश्वर महतो,संजीव गुप्ता, संजय यादव, सोहन गुप्ता, अमरनाथ प्रजापति, संजय राम और रामायण ठाकुर इत्यादि किसान मौजूद रहे। इन किसानों का कहना है कि बगहा क्षेत्र की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और अधिकांश किसान गन्ने की खेती से ही अपनी आजीविका चलाते हैं। नकदी फसल होने के बावजूद उचित मूल्य न मिलने से किसान निराश और मजबूर हो रहे हैं।
वहीं ईंख काश्तकार संघ बिहार के प्रदेश सचिव छोटे श्रीवास्तव के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में की गई मामूली बढ़ोतरी को अस्वीकार्य बताया। किसानों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया।किसानों की मांग है कि गन्ने का न्यूनतम मूल्य कम से कम ₹400 प्रति क्विंटल किया जाए। उनका तर्क है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में किसानों को ₹400 प्रति क्विंटल का भुगतान मिल रहा है,जबकि वहां डीजल भी बिहार की तुलना में लगभग ₹8 प्रति लीटर सस्ता है। इससे बिहार के किसानों की खेती लागत काफी बढ़ जाती है। छोटे श्रीवास्तव ने कहा कि संघ के प्रदेश महासचिव नागेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में गन्ना मंत्री संजय कुमार पासवान से मुलाकात की थी। उस समय मंत्री ने संतोषजनक बढ़ोतरी का आश्वासन दिया था।हालांकि, गन्ना विभाग द्वारा जारी पत्र में उत्तम और मध्यम प्रभेद के गन्ने के मूल्य में केवल ₹15 और न्यूनतम प्रभेद के गन्ने के मूल्य में ₹20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है,जिसे किसानों के साथ धोखा बताया गया है।उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी के बाद भी उत्तम प्रजाति के गन्ने का मूल्य मात्र ₹380 है, जो लागत के मुकाबले बहुत कम है।किसानों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि डीजल महंगा होने से जुताई, सिंचाई और परिवहन की लागत में भारी वृद्धि हुई है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आने वाले दिनों में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। साथ ही, गन्ना बुवाई बंद करने का निर्णय भी लिया जा सकता है।