प्रो. (डॉ.) पद्मदेव नारायण शर्मा वाणिज्य शिक्षा के प्रवर्तक और मनेर का गौरव

*प्रो. (डॉ.) पद्मदेव नारायण शर्मा वाणिज्य शिक्षा के प्रवर्तक और मनेर का गौरव*
*01 जनवरी, 99 वीं जयंती पर बिशेष*
आलेख – *अनमोल कुमार*
*जन्मभूमि और पारिवारिक पृष्ठभूमि*
प्रो. डॉ. पद्मदेव नारायण शर्मा का जन्म भवानी टोला, मनेर, पटना में 31 दिसम्बर 1916 ई० को हुआ था। यह वही पवित्र भूमि है जो सुअरमरवा तपोभूमि के संत शिरोमणि गगन बाबा के भाई भवानी बाबा के नाम पर जानी जाती है।
उनके पिता कपिलदेव नारायण शर्मा मनेर क्षेत्र के प्रतिष्ठित और उच्च कोटि के कृषक थे, जिन्होंने अपने पुत्र को शिक्षा और अनुशासन का सर्वोच्च संस्कार दिया।
*शैक्षणिक जीवन*
पद्मदेव नारायण शर्मा ने अपने प्रारंभिक शिक्षा जीवन में ही विद्वता और गंभीर अध्ययन का परिचय दिया। उच्च शिक्षा हेतु उन्होंने विदेश का मार्ग चुना और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से स्नातक अर्थशास्त्र से प्रतिष्ठा की डिग्री प्राप्त की।
यह उपलब्धि मनेर क्षेत्र में अत्यंत दुर्लभ थी । वे इस क्षेत्र के प्रथम और अंतिम छात्र बने।
उनकी शिक्षा ने उन्हें न केवल आर्थिक विज्ञान में पारंगत बनाया, बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण और आधुनिक शिक्षाशास्त्र की समझ भी दी।
*वाणिज्य महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय की स्थापना*
1953 में, उनके अथक प्रयास और दूरदर्शिता के कारण पटना कॉलेज में स्नातक वाणिज्य की शुरुआत हुई।
उनकी दूरदर्शिता और शिक्षा के प्रति समर्पण ने इन्हें आगे चलकर वाणिज्य महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय का नाम और स्वरूप देने में निर्णायक भूमिका निभाई।
1962 में जब महाविद्यालय को औपचारिक रूप से स्थापित किया गया, उन्हें इसका प्रथम प्राचार्य नियुक्त किया गया।
उनके नेतृत्व में कॉलेज ने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई, बल्कि अनुशासन, नैतिकता और समाजसेवा को भी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया।
वाणिज्य महाविद्यालय आज भी उनके द्वारा स्थापित मूल सिद्धांतों और आदर्शों पर चलता है।
*शिक्षा दर्शन और व्यक्तित्व*
डॉ. शर्मा मानते थे कि – वाणिज्य केवल लाभ कमाने का विज्ञान नहीं, बल्कि समाजसेवा और जिम्मेदारी निभाने का विज्ञान है।
वे अपने विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान नहीं देते थे, बल्कि उन्हें ईमानदारी, सामाजिक जिम्मेदारी और नेतृत्व कौशल की शिक्षा भी प्रदान करते थे।
उनके व्यक्तित्व में सादगी, गहनता और प्रेरणा का अद्भुत संगम था।
*राजनीतिक जीवन और सामाजिक योगदान*
शिक्षक के रूप में उनका योगदान ही सीमित नहीं था — वे बिहार के पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से 1952 से 1996 तक लगातार विधान परिषद सदस्य रहे।
सत्येन्द्र नारायण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री (ग्रामीण विकास एवं संस्थागत वित्त विभाग) के रूप में कार्य किया।
उनके नेतृत्व में ग्रामीण विकास, सहकारी संस्थाएँ और शिक्षा विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई।
*मनेर का गौरव और शिक्षा-ज्योति का दीप*
भवानी टोला, मनेर की पवित्र भूमि ने उन्हें जन्म दिया और शिक्षा, अनुशासन और नैतिकता का संस्कार दिया।
उन्होंने मनेर और बिहार को शिक्षा, राष्ट्रसेवा और नीति निर्माण के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया।
उनकी प्रेरणा आज भी वाणिज्य महाविद्यालय और पटना विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र में जीवित है।
प्रो. डॉ. पद्मदेव नारायण शर्मा —
मनेर की मिट्टी से उपजे, लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से शिक्षित, बिहार में वाणिज्य शिक्षा के प्रवर्तक, विधायक और मंत्री
एक ऐसा व्यक्तित्व जो शिक्षा, नीति और समाज सेवा का अद्वितीय मिश्रण था। गुरु वह नहीं जो केवल पढ़ाए, बल्कि वह जो जीवन दृष्टि और चरित्र भी आकार दे – वही हमारे गुरुदेव थे।