नव वर्ष में उम्रदराज बंधु इन्हें छोड़ दीजिए

*नव वर्ष में उम्रदराज बंधु इन्हें छोड़ दीजिए*         

रचना – अनमोल कुमार

         
   *बढ़ती उम्र में इन्हें छोड़ दीजिए।।*  

एक दो बार समझाने से यदि कोई नहीं समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना,
       *छोड़ दीजिए* 

बच्चे बड़े होने पर वो ख़ुद के निर्णय लेने लगे तो उनके पीछे लगना,
     *छोड़ दीजिए।* 

गिने चुने लोगों से अपने विचार मिलते हैं, यदि एक दो से नहीं मिलते तो उन्हें,
       *छोड़ दीजिए।* 

एक उम्र के बाद कोई आपको न पूछे या कोई पीठ पीछे आपके बारे में गलत कह रहा है तो दिल पर लेना,
       *छोड़ दीजिए।*  

अपने हाथ कुछ नहीं, ये अनुभव आने पर भविष्य की चिंता करना,
      *छोड़ दीजिए।*  

यदि इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क पड़ रहा है तो खुद से अपेक्षा करना,
     *छोड़ दीजिए।* 

हर किसी का पद, कद, मद, सब अलग है इसलिए तुलना करना,
      *छोड़ दीजिए।* 

बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना,
        *छोड़ दीजिए।* 

उम्मीदें होंगी तो सदमे भी बहुत होंगे, यदि सुकून से रहना है तो उम्मीदें करना,
        *छोड दीजिए।*

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