गांधी – विनोबा के विचार – मंथन समाजिक समरता का उद्योत – डाॅ शशिभूषण शर्मा

*गांधी – विनोबा के विचार – मंथन समाजिक समरता का उद्योत – डाॅ शशिभूषण शर्मा*

  *’आचार्यकुल’ का अंतर्राष्ट्रीय समागम का उद्घाटन*

रिपोर्ट अनमोल कुमार

बोधगया ।  आचार्यकुल का त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्धाटन समारोह में विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग, झारखंड के कुलपति, डाॅ शशिभूषण शर्मा ने कहा कि गांधी – विनोबा के विचार – मंथन ही समाजिक समरसता का द्योतक हैं। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे के भूदान आन्दोलन और गांधीजी का सर्वज्ञा आन्दोलन देश ही नहीं,विदेश को नयी दिशा दिया। समारोह की अध्यक्षता आचार्यकुल के पूर्व कुलपति एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष,आचार्य धर्मेन्द्र ने किया।                               ज्ञान और मोक्ष की पवित्र भूमि बोधगया एक महत्वपूर्ण वैचारिक मंथन का केंद्र बनने जा रहा है।यह उद्बोधन आचार्य,धर्मेन्द्र ने किया।                       आचार्यकुल का तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन 16 से 18 दिसम्बर, 2025 को बोधगया से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित बोधि ट्री स्कूल, श्रीपुर (बोधि ट्री एजुकेशनल फाउंडेशन) में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन का उद्देश्य महात्मा गांधी, संत विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की रचनात्मक विचारधाराओं को अंगीकार करने वाले चिंतकों को एक मंच पर लाना है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के 12  राज्यों एवं  अमेरिका , इंग्लैंड , वाशिंगटन, यूके आदि देशों के  आचार्यकुल के सदस्य, भूदान यज्ञ के प्रतिनिधि, साहित्यकार, कवि, पत्रकार और समाजसेवी शामिल हुए। संत विनोबा भावे जी की मानस पुत्री और आचार्यकुल की स्थायी ब्रह्मचारिणी, सुश्री प्रवीणा देसाई ने बीमार होने के कारण अनुपस्थिति रही, परन्तु उसके संदेश को पढकर सुनाया गया। विश्वभर के निर्भिक, निष्पक्ष, अहिंसक, असंप्रदायिक, अराजनैतिक चिन्तकों के विचारों पर मंथन हुआ।यह अधिवेशन वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच गांधीवादी और रचनात्मक सोच की प्रासंगिकता को स्थापित करने का एक प्रयास है।
आचार्यकुल की अंतरराष्ट्रीय  अधिवेशन का मुख्य एजेंडा कई दूरगामी और ऐतिहासिक महत्व के विषयों पर विचार-विमर्श करना है। विचारणीय बिषयों में शामिल हैं:। 2027 में आचार्यकुल के 60वें वर्षगांठ की भव्य तैयारी की रूपरेखा। स्थापना वर्ष 2026, 2027 एवं 2028 हेतु आचार्यकुल के प्रमुख कार्यक्रम ‘जय जगत’ की गतिविधियों पर मंथन। भूदान यज्ञ आन्दोलन के 75वें वर्ष (2026) के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रमों के आयोजन पर विचार। चरखा संघ के स्थापना वर्ष पर भी महत्वपूर्ण चर्चा। ग्राम सभा सहयोग अभियान को सशक्त बनाने की रणनीति। विभिन्न संगठनात्मक कोषांगों के कार्यों की समीक्षा और सदस्यता अभियान का विस्तार। साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता प्रकोष्ठ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त बनाने, गठन और विस्तार पर गहन विचार। राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मधु गोयल ( लन्दन) एश्वर्य आर्य और कुशवाहा ( यूके), प्रशांति दीदी और गोविन्द ( वाशिंगटन) माँ ममता देवी, हेम भाई ( असम), अनुज, हृदयानन्द आदि ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति किया।

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