बगहा में सुहागिनों ने अपने-अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखी हरितालिका तीज वर्त

बगहा।भाद्र शुक्ल तृतीय के दिन मनाया जाने वाला हरितालिका तीज पर्व मंगलवार को महिलाओं ने घरों और शिवालय में पूजा अर्चना कर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।वही बगहा में महिलाओं ने मंदिर एवं घरों में पूजा अर्चना करने के बाद सामूहिक रूप से नृत्य गान किया गया।हरितालिका तीज के बारे में पंडित योगेंद्र जी ने बताया की भाद्र शुक्ल तृतीया में व्रत रख कर शिव पार्वती की पूजा उपासना करने से पारिवारिक सुख शांति तथा कल्याण की प्राप्ति होती है।पौराणिक मान्यता है की सतयुग में हिमालय पुत्री पार्वती ने गौरी घाट में तपस्या कर महादेव को पति के रूप में पाने का वरदान प्राप्त किया था,लेकिन वरदान के विपरीत माता पार्वती के पिता हिमालय ने पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करने का जिद कर रहे थे।यह बात पार्वती ने अपने सहेलियों को बताया।पार्वती की बात सुन उनकी सहेलियों ने पार्वती को हरण कर एक गुफा में छुपा दिया।गुफा में ही पार्वती ने महादेव को पाने के लिए निराहार व्रत रख कर महादेव को पति के रूप में प्राप्त किया था।जिस दिन पार्वती की सहेलियों ने पार्वती का हरण कर गुफा में लाया था।उस दिन भाद्र शुक्ल तृतीया था।उसी समय से हरितालिका तीज व्रत का प्रचलन शुरू हुआ।हरितालिका शब्द संस्कृत भाषा के हरित तथा आलिका शब्द को मिलाकर बना है।इसमें हरित शब्द का अर्थ हरण करना तथा आलिका शब्द का अर्थ साथी है।इस तरह से जिस दिन पार्वती की सहेलियों ने माता पार्वती का हरण कर गुफा में लाया था और पार्वती ने निराहार व्रत रखा था उस दिन को हरितालिका तीज के रूप में माना जाने लगा।