पेड़ लगाओ जीवन बचाओ “एक पेर मां के नाम:-ब्रम्हाकुमारी बबिता दीदी।

*पेड़ लगाओ जीवन बचाओ “एक पेर मां के नाम:-ब्रम्हाकुमारी बबिता दीदी*
रिपोर्ट अनमोल कुमार
आजादी के 78 वीं वर्ष के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सिमराही बाजार के तत्वाधान में परमात्मा अनुभूति संग्रहालय के प्रांगण में स्नेह मिलन के साथ पौधा रोपण का कार्यक्रम स्थानीय प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबीता दीदी ,समाज के वरिष्ठ समाजसेवी प्रोफेसर बैद्यनाथ प्रसाद भगत, व्यावसायिक एवं वरिष्ठ समाजसेवी सचिन मदहोगारिया ,अरुण जायसवाल दीपक यादव, बृजेश कुमार, रंजीत कुमार, अरुण कुमार, ब्रह्माकुमारी पूजा बहन ,साक्षी बहन, ब्रह्माकुमार किशोर भाई जी इत्यादियो ने संगठित रूपमें पौधारोपण करके किया। संपूर्ण अतिथियों को शब्दों द्वारा स्वागत और सम्मान राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबीता दीदी जी ने की।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बाबिता दीदी जी ने अपने उदबोधन देते हुए कहा कि मानव जीवन का अस्तित्व वृक्षों पर निर्भर है। मनुष्य को जीवित रहने के लिये ऑक्सीजन तथा पानी की अति आवश्यकता है। वनस्पति ही ऑक्सीजन का प्राकृतिक स्रोत है। पेड़ पौधे पर्यावरण में ऑक्सीजन छोडते हैं जिसे हम श्वसन के लिये उपयोग करते हैं। हमारे जीवन के लिये ऑक्सीजन अति आवश्यक है। इसके बिना जीवन की कल्पना सम्भव नहीं है, इसलिये इसे प्राण वायु कहा जाता है। वैश्विक महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के अभाव के कारण टूटती सांसों ने लोगों को वृक्षारो-पण एवं वृक्षों के संरक्षण के महत्व को समझा दिया है। हमारे वातावरण में प्राणवायु का स्तर सामान्य बना रहे, इसके लिये पेड़ पौधों का संरक्षण अति आवश्यक है। लगातार काटे जा रहे वृक्षों के कारण पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन ने अनेक समस्याओं को जन्म दिया है। अन्धाधुन्ध पेड़ों की कटाई के कारण बरसात एवं पर्यावरण का सन्तुलन बिगड़ता जा रहा है। पीपल, बरगद जैसे देव-वृक्ष जो सैकड़ों साल जीवित रहते थे, उनकी कमी के कारण कार्बन्डाईक्साइड की वृद्धि हुई। जिसके परिणाम स्वरूप वैश्विक तापमान बढ़ने ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्यायें उत्पन्न हुई, जो प्रकृति को विनाश की ओर अग्र-सर कर रही है। ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान केवल वृक्षारोपण में है। पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने का यह प्रमुख कदम है। भारत में तो काटे जाने वाले प्रत्येक के बदले में पांच पेड़ लगाये जाने की परम्परा हमारी संस्कृति का एक हिस्सा रही है। हमारे देश में घरों के आंगन में तुलसी लगाने की पुरानी परम्परा रही है। ऐसी संस्कृति को हमें जीवित रखना है। इसलिए एक पर अपने जीवन में जरूर लगानी चाहिए ऐसा अभियान हम सभी ने शुरू किया है कि इस 78 वें आजादी के उपलक्ष्य में जरूर देश व समाज के सभी नागरिक एक पेड़ लगाए ऐसा हमारी सोच एवं कामनाएं(आग्रह) है।
नैतिक शिक्षा से व्यक्तित्व का विकास :- समाजसेवी सचिन माधोगंड़िया
उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज के वरिष्ठ समाजसेवी सचिन माधोगड़िया जी ने अपने उद्बोधन में कहा की एक आदर्श समाज में नैतिक सामाजिक व आध्यात्मिक मूल्य प्रचलित होते हैं। नैतिक मूल्यों का हमें सम्मान करना चाहिए। मूल्य शिक्षा द्वारा ही बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। मूल्य शिक्षा ही जीवन को सशक्त, सकारात्मक और विकसित बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में कार्यकुशलता, व्यवसायिक दक्षता ,बौद्धिक विकास एवं विभिन्न विषयों के साथ आपसी स्नेह, सत्यता ,पवित्रता, अहिंसा, करुणा, दया इत्यादि मानवीय मूल्यों के पाठ भी हम सभी को पढ़ना जरूरी है। क्योंकि वर्तमान के युवाओं भावी समाज है। उन्होंने कहा मानवीय मूल्यों के ह्रास के कारण समाज में हिंसक वृत्ति बढ़ती जा रही है ।विद्या या विमुक्ताए ही शिक्षा का मूल उद्देश्य है। शिक्षा लेने के बाद हम सभी को नकारात्मक से ,व्यर्थ से, तनाव से ,व्यसनों ,विकारों से मुक्त होना है ।ऐसी शिक्षा की आवश्यकता आज युवाओं को है। उन्होंने कहा कि मूल्यों शिक्षा के ह्रास के कारण मानव संबंधों में तनाव , अविश्वास,अशांति बढ़ती जा रही है ।जिस कारण सामाजिक हिंसा बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा वैज्ञानिक प्रगति ,सूचना, संसार प्रौद्योगिक विकास के बावजूद भी मनुष्य जीवन में बढ़ रही हताशा, निराशा और स्थिरता, भय, हत्या अश्लीलता, मादक सेवन यह सभी नैतिक मूल्यों की कमी के कारण है ।उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में समाज को नई दिशा देने के लिए आध्यात्मिकता की मूल्य शिक्षा की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि समाजसेवी प्रोफेसर बैजनाथ प्रसाद भगत जी ने अपने उदबोधन में कहीं आध्यात्मिकता ही सद्गुणों का स्रोत है ।जब तक जीवन में आध्यात्मिकता नहीं अपनाते हैं तब तक जीवन में मानवीय नैतिक मूल्य नहीं आ सकता है। जीवन में सद्गुणों की धारणा से ही हम प्रशंसा के पात्र बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि मूल्य ही जीवन की सुंदरता और वरदान है। जीवन में धारणा किए हुए मूल्यों ही हमारे श्रेष्ठ चरित्र की निशानी है ।हमें श्रेष्ठ आचरण बनाने हेतु अच्छे साहित्य ,बड़ों के आज्ञाओं का पालन, बुरी संगत से दूर रहने की सलाह दी ।उन्होंने ब्रम्हाकुमारीयों के द्वारा की गई कार्योको सराहना करते आभार व्यक्त किया।
ब्रह्माकुमारीज सिमराही के परमात्मा अनुभूति संग्रहालय के संचालक ब्रह्माकुमार किशोर भाई जी ने अपना उद्बोधन मे कहा कि वृक्षारोपण के समय पौधे को संकल्प दे आज इस सृष्टि में आपका नया जन्म हुआ है, आप विश्व कल्याणकारी परमात्मा के सन्तान हो। आपको अपना स्वास्थ्य विकास करना है, हर कठिन परिस्थितियों में भी आपको खड़े रहना है, विश्व कल्याणकारी बनकर सबको सुख देना है। फल-फूल, ऑक्सीजन देना है, छाँव देना है, अनेकों जीव-राशियों का आश्रय स्थान बनना है, पूरे विश्व को आपका योगदान जरुरी है। अपने नयनों द्वारा परमात्मा की शक्ति तथा वायब्रेशन्स उप पेड़ में प्रवाहित होते हुए महसूस करें। इस तरह बात करके हाथ फेर कर कहे कि इस सृष्टि को सुन्दर बनाने में आपकी अहम् भूमिका है।
पर्यावरण संरक्षण के नारे
साथी हाथ बढ़ायेंगे, पर्यावरण को स्वच्छ बनायेंगे।
पर्यावरण का रखें ध्यान, तभी बनेगा देश महान।
हम सब मिलकर प्रण करेंगे, घर आंगन को स्वच्छ करेंगे।
आपस में हम मदद करेंगे, गली-मोहल्ले साफ रखेंगे।
प्रकृति का न करें हरण, आओ बचायें पर्यावरण।
बंजर धरती करे पुकार, यौगिक खेती का सपना हो साकार।
पर्यावरण का स्लोगन
स्वच्छता में प्रभुता है।स्वच्छ पर्यावरण सुख-शान्ति का आधार, वृक्ष लगाकर करो इसका श्रृंगार।जीवन में होगी खुशहाली, प्रकृति की करो रखवाली।
उक्त कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मा कुमार किशोर भाई जी ने किया।
मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी प्रोफेसर बैद्यनाथ प्रसाद भगत, व्यावसायिक एवं वरिष्ठ समाजसेवी सचिन मदहोगारिया ,अरुण जायसवाल दीपक यादव, बृजेश कुमार, रंजीत कुमार, अरुण कुमार, ब्रह्माकुमारी पूजा बहन ,साक्षी बहन, इत्यादि मौजूद थे।