नवग्रह के लिए रुद्राभिषेक -पं-भरत उपाध्याय
*नवग्रह के लिए रुद्राभिषेक -पं-भरत उपाध्याय*

मधुबनी।सूर्य- लाल चन्दन मिश्रित जल से अभिषेक। लाल चंदन नकली बहुत मिलता है। यह आपका कर्तव्य है कि असली लाल चंदन खोजें। अन्यथा लाल चंदन की लकड़ी लेकर उसका चूर्ण बना लें और जल में घोल लें। अभिषेक के बाद गुड़, गाय का घी और शहद भी शिवलिङ्ग पर अर्पित करें। लाल गुड़हल के पुष्प अर्पित करें।
चंद्र- कच्चे दूध में काले तिल डालकर अभिषेक। सामान्य श्रृंगी का छिद्र छोटा होता है तो पहले से सुनिश्चित कर लें काले तिल उसमें से निकल पा रहे हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त अभिषेक के बाद जल में देसी कर्पूर मिला कर अर्पित करें। गाय का घी, सफेद चंदन अर्पित करें। सफेद आंकड़े के पुष्प अर्पित करें।
मंगल- गिलोए की बूटी के रस से अभिषेक। गिलोय का चूर्ण किसी अच्छे पंसारी से लेकर उसको घोल लें और छान लें। अभिषेक के बाद गुड़, गाय का घी और शहद भी शिवलिङ्ग पर अर्पित करें। अगर आपका मंगल कर्क राशि में है तो शहद को पतला कर उससे रुद्राभिषेक करें। लाल कनेर के पुष्प अर्पित करें। अगर मंगल और शुक्र एक साथ हैं तो गुलाबजल अर्पित करें।
बुध- विधारा की बूटी के रस से अभिषेक। विधारा का चूर्ण किसी अच्छे पंसारी से लेकर उसको घोल लें और छान लें। चूर्ण न मिले तो विधारा को पानी में उबाल कर उसको छान कर रस बना लें। अभिषेक के बाद दूर्वा, तुलसी और बिल्वपत्र अर्पित करें। 108 बिल्वपत्र लेकर उसमें जौं मिला कर एक एक करके अर्पित करें।
बृहस्पति- कच्चे दूध में केसर मिलाकर अभिषेक। केसर को अच्छी तरह घोल लें। अच्छा रहेगा थोड़े से गंगाजल में 5-6 घंटे घोलकर छोड़ दें और फिर दूध में मिला लें। अभिषेक के बाद पीला चंदन, पीले फल, पीली मिठाई, पीले फूल भी अर्पित करें। देसी गाय का पीला घी भी अर्पित करें।
शुक्र- पंचामृत से अभिषेक। पञ्चामृत में सबसे अधिक मात्रा दूध की होगी। बाकी सब उससे चौथाई अनुपात में होंगे। सामान्य श्रृंगी का छिद्र छोटा होता है तो पहले से सुनिश्चित कर लें पञ्चामृत उसमें से निकल पा रहा है या नहीं। इसके अतिरिक्त घी अर्पित करें। सुगंधित इत्र, सफेद सुगंधित पुष्प अर्पित करें। नन्दी जी को चिकना सुंदर वस्त्र अर्पित करें।
शनि- गन्ने के रस से अभिषेक। गन्ने के रस को पहले अच्छी तरह छान लें। इसके अतिरिक्त काले तिल, आंकड़े के पुष्प जरूर अर्पित करें। बिल्वपत्र में काले तिल और अक्षत मिलाकर सहात्रार्चन करें।
राहु केतु- भांग मिश्रित कच्चे दूध से अभिषेक करें। भांग को अच्छी तरह घोटकर दूध में मिलाकर, छानकर ही अभिषेक करें। इसके अतिरिक्त धतूरा अर्पित करें। बिल्वपत्र में काले तिल और जौं मिलाकर सहात्रार्चन करें। अलसी के तेल का दीपक प्रज्वलित करें जो सम्पूर्ण रात्रि जलता रहे। राहु और केतु के लिए सामान्यतः एक ही प्रकार से अभिषेक बताया जाता है।